Category: Uncategorized
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50. टांक लिए भ्रम, गीतों के दाम की तरह !
लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज असहिष्णुता के बारे में बात करने की इच्छा है। ये असहिष्णुता, उस असहिष्णुता की अवधारणा से कुछ अलग है, जिसको लेकर राजनैतिक दल चुनाव से पहले झण्डा उठाते रहे हैं, और अवार्ड वापसी जैसे उपक्रम होते रहे हैं। मुझे इसमें कतई कोई संदेह नहीं है कि समय…
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189 . ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं!
#IndiSpire आज इंडिस्पायर पर सुझाए गए विषय के आधार पर, आलेख लिखने का प्रयास कर रहा हूँ- #MyPhilosophyOfLife सबसे पहले तो निदा फाज़ली साहब की गज़ल के कुछ शेर याद आ रहे हैं- दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है। ग़म हो कि ख़ुशी…
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49. आज मौसम पे तब्सिरा कर लें !
लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- यह ब्लॉग पिछले वर्ष बरसात के मौसम में लिखा था। कहते हैं कि मौसम पर बात करना सबसे आसान होता है लेकिन जब मौसम अपनी पर आ जाए तब उसको झेलना सबसे मुश्किल होता है। मैंने भी अपने कुछ गीतों में और एक गज़ल में मौसम का ज़िक्र…
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188 . संस्मरण के बहाने मगर, याद आने से क्या फायदा!
मैंने जब ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब शुरू के बहुत सारे ब्लॉग अपने जीवन से जोड़कर लिखे थे, जिसमें बहुत से मित्रों और ऐसे लोगों का ज़िक्र किया था, जिनसे जीवन को दिशा मिली, प्रेरणा मिली। यह बात मैं नौकरी की गतिविधियों से अलग कह रहा हूँ, वैसे नौकरी से जुड़े बहुत से प्रसंग…
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187 . हुआ करे, जो समंदर मेरी तलाश में है!
आज कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की लिखी एक बहुत प्यारी गज़ल शेयर कर रहा हूँ, इस गज़ल के कुछ शेर जगजीत सिंह जी ने भी गाए थे। इस गज़ल के कुछ शेर वास्तव में बहुत अच्छे हैं, जैसे- ‘मैं जिसके हाथों में एक फूल दे के आया था, उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश…
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186 . धूल हूँ मैं, वो पवन बसंती!
आज एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, जो फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ के लिए मुकेश जी ने गाया था। गीत मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था- लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी की जोड़ी ने। एक और गीत सुना होगा आपने- ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’, यह गीत भी उस तरह…
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185. ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!
आज फिर से क़तील शिफाई जी की लिखी एक गज़ल आ रही है, खास तौर पर इसका एक शेर- ‘वो मेरा दोस्त है, सारे जहाँ को है मालूम, दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे! सचमुच बहुत सुंदर भाव है, और यह भी ‘कि संग तुझपे गिरे और ज़ख्म आए मुझे’, वास्तव में…
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184. आ जाए कोई शायद, दरवाज़ा खुला रखना!
आज भूपिंदर सिंह और मीताली सिंह की गाई एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे क़तील शिफाई जी ने लिखा है और इस गायक जोड़ी ने बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। गज़ल में जो मुख्य बातें कही गई हैं, वे इस ओर इशारा करती हैं कि हम दिल में आशा, इंतज़ार और लोगों…
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48. कोई तो आसपास हो, होश-ओ-हवास में !
बिना किसी बहाने के, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- जब ब्लॉग लिखना शुरू किया था तो यह विचार किया था कि इसमें दलगत राजनीति के बारे में कुछ नहीं लिखूंगा। वैसी कोई बात लिखनी हो तो कहीं और लिख सकता हूँ। लेकिन जैसे राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, उसी तरह उसके…
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47. छाया मत छूना मन, होगा दुख दूना मन !
आज फिर से आसान वाला रास्ता चुनता हूँ, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- हाल में हुई एक घटना पर टिप्पणी करने का मन हो रहा है। इस घटना के पात्र हैं सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन और आज के लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास । घटना के बारे में चर्चा करने से…