Category: Uncategorized
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Mediocrity versus Merit!
Today I am talking about common people, yes- the people who form the majority anywhere and they bring all the changes in the world. It is said that these are middle class, but I would say these are mediocre people. In the process of progression anybody can be a part of middle class or…
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मैं क्या जिया ?
आज डॉ धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| भारती जी ने कविता, कहानी, उपन्यास आदि सभी विधाओं में अपना बहुमूल्य योगदान किया था| उनकी कुछ रचनाएँ- सूरज का सातवाँ घोडा, अंधा युग, ठंडा लोहा, ठेले पर हिमालय, सात गीत वर्ष आदि काफी प्रसिद्ध रहीं| वे साप्ताहिक पत्रिका- धर्मयुग के यशस्वी संपादक…
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संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप!
श्री कुबेर दत्त जी मेरे मित्र रहे थे जब वे संघर्ष कर रहे थे, दूरदर्शन में स्थापित होने से पहले| अत्यंत भावुकतापूर्ण गीत लिखा करते थे, अखबारों में छपने के लिए परिचर्चाएँ किया करते थे| एक परिचर्चा का शीर्षक मुझे अभी तक याद है- ‘ज़िंदगी है क़ैद पिंजरों में’ जिसमें उन्होंने मुझे भी शामिल किया…
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मिली हमें अंधी दीवाली, गूँगी होली बाबू जी!
मेरे अग्रजों में से एक डॉ कुँवर बेचैन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी उस महानन्द मिशन कॉलेज, गाजियाबाद में प्रोफेसर रहे हैं जहां मैंने कुछ समय अध्ययन किया, यद्यपि मेरे विषय अलग थे| दिल्ली में रहते हुए गोष्ठियों आदि में उनको सुनने का अवसर मिल जाता था, बाद में…
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जो पुल बनाएँगे – अज्ञेय
आज एक छोटी सी कविता शेयर कर रहा हूँ, अज्ञेय जी की यह कविता छोटी सी है परंतु बड़ी बात कहती है| अज्ञेय जी हिन्दी साहित्य का ऐसा युगांतरकारी व्यक्तित्व थे, वे भारत में प्रयोगवाद और नई कविता के प्रणेता रहे| हाँ वे विशेष रूप से कम्युनिस्टों के निशाने पर रहते थे| कविता, कहानी, उपन्यास,…
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खेल-खिलौने- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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जिगर मा बड़ी आग है!
ओंकारा फिल्म का एक गीत याद आ रहा जो गुलज़ार साहब ने लिखा, एक तरह से एक्स्प्रेशन के मामले में एक्सपेरीमेंट है| इस गीत का संगीत दिया है विशाल भारद्वाज जी ने और इसे गाया है सुनिधि चौहान और सुखविंदर सिंह ने| लीजिए इस गीत की कुछ पंक्तियाँ देख लेते हैं- ना गिलाफ,…
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मरघट में पी खामोशी से, पनघट पर शोर मचाकर पी!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – आस्था के बारे में एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना था। ये माना जाता है कि यदि आप सच्चे मन से किसी बात को मानते हैं, इस प्रसंग में यदि आप ईश्वर को पूरे मन से मानते हैं, तो…
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Lead me Light or Darkness!
Today again I am submitted my views based on an #IndiSpire prompt. The question is whether the role of masses is only of becoming good and obedient followers. In Indian culture and philosophy, let me refer to The Bhagvad Gita, where Lord Krishna tells in his message to Arjuna- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति…