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सर्द है अंगार की भाषा!
हिन्दी काव्य मंचों के अद्भुद हस्ताक्षर माननीय सोम ठाकुर जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| यह गीत मंचों के मतलब का कम और पढ़ने और मनन करने का अधिक है| गीत में हमारे भटकाव और लक्ष्यों के ओझल होने की बात है| गीत में हमारे रोशनी से भरे संकल्पों की भी बात…
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जिसमें तहख़ानों में तहख़ाने लगे हैं!
आज फिर से दुष्यंत कुमार जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक प्रतिनिधि कवि थे लेकिन उनको सामान्य जनता के बीच विशेष ख्याति आपातकाल में लिखी गई गज़लों के कारण मिली थी, जिनको बाद में एक संकलन – ‘साये में धूप’ के रूप में प्रकाशित किया गया| प्रस्तुत…
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ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं!
आज फिर से दुष्यंत कुमार जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक प्रतिनिधि कवि थे लेकिन उनको सामान्य जनता के बीच विशेष ख्याति आपातकाल में लिखी गई गज़लों के कारण मिली थी, जिनको बाद में एक संकलन – ‘साये में धूप’ के रूप में प्रकाशित किया गया|प्रस्तुत है…
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जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता!
उर्दू के विख्यात शायर निदा फाजली साहब की एक गजल शेयर कर रहा हूँ, निदा साहब बड़ी सहज भाषा में बहुत गहरी बात कह देते हैं| उनकी कुछ पंक्तियाँ जो बरबस याद आ जाती हैं, वे हैं- ‘मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी, बिन तार’,…
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कैसा मौसम है ये!
आज हम ऐसे समय में चल रहे हैं जिसकी न किसी ने पहले कल्पना की होगी और निश्चित रूप से किसी ने इसकी कामना तो नहीं ही की होगी| जी हाँ कोरोना की महामारी का यह काल, पूरी मानव जाति को इसने त्रस्त करके रखा है| सब यही सोचते रहते हैं कि कब यह दौर…
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पुष्पों का विद्यालय – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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राजा को खबर तक नहीं!
आज मैं पंडित श्रीकृष्ण तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जो मेरे हमनाम हैं (मैं शर्मा हूँ, वे तिवारी हैं), वाराणसी के निवासी हैं और उन्होंने कुछ बहुत सुंदर नवगीत लिखे हैं| मैंने अपनी संस्था के लिए किए गए आयोजनों में से एक में श्री तिवारी जी को बुलाया था जिसमें उन्होंने…
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आँचल बुनते रह जाओगे!
लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का लिखा एक सुंदर गीत| रामावतार त्यागी जी किसी समय हिन्दी कवि सम्मेलनों में गूंजने वाला एक प्रमुख स्वर हुआ करते थे| यह गीत भी उनकी रचनाशीलता का एक उदाहरण है- मैं तो तोड़ मोह के बंधनअपने गाँव चला जाऊँगा,तुम आकर्षक सम्बन्धों का,आँचल बुनते रह जाओगे| मेला…
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That stone, broke everything!
This is the story of Ravi, which I would write, as if he is writing it. Today is going to be a day full of activities. Election results are to be announced today. My Netaji, who is my mentor, I have been living at his bungalow, the MLA residence, here in the capital city of…
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हर लड़की की अम्मा मुझको!
आज स्वर्गीय गोपाल प्रसाद व्यास जी की एक हास्य कविता शेयर कर रहा हूँ| व्यास जी किसी समय दिल्ली में ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के कर्ता-धर्ता हुआ करते थे| लाल-किले पर प्रतिवर्ष स्वाधीनता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर आयोजित होने वाले विराट कवि-सम्मेलन के भी वही आयोजक होते थे, जहां मुझे बहुत से प्रमुख कवियों को…