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दिया जलाये जो दर पर!
ये मेरे घर की उदासी है और कुछ भी नहीं,दिया जलाये जो दर पर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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सितमग़र मेरी तलाश में है!
ये और बात कि पहचानता नहीं मुझे,सुना है एक सितमग़र मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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भेस बदल कर मेरी तलाश में है!
बस एक वक़्त का ख़ंजर मेरी तलाश में है,जो रोज़ भेस बदल कर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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घर की याद !
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा अपनी ही अलग किस्म के कवि थे जो बातचीत के लहज़े में कभी-कभी बहुत दिव्य बात कह जाते थे| जैसे कवि कालिदास जी ने बादलों के माध्यम से अपने प्रेम का संदेश भेजा था, इस…
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कोई देर में जाने वाला!
इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया,कोई जल्दी में कोई देर में जाने वाला| निदा फ़ाज़ली
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आंगन में समाने वाला!
दूर के चांद को ढूंढ़ो न किसी आँचल में,ये उजाला नहीं आंगन में समाने वाला| निदा फ़ाज़ली
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घर छोड़ के जाने वाला!
उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था,सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला| निदा फ़ाज़ली
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आने को है आने वाला!
एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा,जिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला| निदा फ़ाज़ली
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ख़ामोशी पहचाने कौन!
मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौन,आवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन। निदा फ़ाज़ली