Category: Uncategorized
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मानहानि – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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बूंद बन-बन टूट जाऊँगा वहां
हिन्दी के गीत- कविता संसार के एक और अनमोल रत्न स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी को आज याद कर रहा हूँ| पहले भी इनके कुछ गीत मैंने शेयर किए है| भावुकता का अजीब संसार होता है इन लोगों के पास, जिसमें ये जीते हैं और अपनी अनूठी अनुभूतियों से हमें परिचित कराते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
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Justice the Princess!
We are living in the greatest democracy in the world, though we might be having some great minds who never find anything positive with our Country. Yes, there are some discrepancies associated with any system or arrangement. One big thing which all modern societies claim is that all are equal before law. Yes, very true,…
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ये बिल्ली जाने कब से मेरा रस्ता काट जाती है!
ज़नाब बेकल उत्साही जी भी किसी समय कवि-सम्मेलनों की शान हुआ कराते थे| आजकल तो लगता है कि उस तरह के कवि-सम्मेलन ही नहीं होते, वैसे भी मैं काफी समय पहले हिन्दी भाषी इलाका छोड़कर गोवा में आ गया हूँ, अब यहाँ कवि सम्मेलन की उम्मीद, वो भी इस कोरोना काल में! खैर पुराना समय…
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शाश्वतता की कगार – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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चिड़ियों को दाने, बच्चों को, गुड़धानी दे मौला!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, पर मैं अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी सभी ऐसे हों, ऐसा नहीं…
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आँखों से आँसू की बिछुड़न, होंठों से बाँसुरियों की!
मेरे लिए गुरु तुल्य – डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का एक गीत और आज शेयर कर रहा हूँ| कविता, गीत, ग़ज़ल आदि की यात्रा तो निरंतर चलती रहती है। डॉक्टर बेचैन एक सृजनशील रचनाकार हैं और कवि सम्मेलनों में खूब डूबकर अपने गीत पढ़ते हैं| कुछ गीत जो बहुत शुरू में उनका सुने थे, आज…
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और फिर मानना पड़ता है, ख़ुदा है मुझ में
आज उर्दू शायरी के एक और सिद्धहस्त हस्ताक्षर स्वर्गीय कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| नूर साहब भी अपने अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते थे| आइए आज इस अलग क़िस्म की ग़ज़ल का आनंद लेते हैं- आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है, मुझ में|और फिर मानना पड़ता…
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मकान ख़ाली हुआ है, तो कोई आएगा!
आज उर्दू शायरी में अपनी अलग पहचान बनाने वाले, डॉक्टर बशीर बद्र जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बशीर बद्र जी शायरी में प्रयोग करने के लिए विख्यात हैं| आज मैं उनकी जो ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, वह एक रूमानी ग़ज़ल है| हमेशा सीरियस बातें तो ठीक नहीं हैं, इसलिए आज इस…
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एक करो अपराध सुर्खियों में छा जाओगे!
श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी एक सुरीले और सृजनशील गीतकार हैं| संयोग से वे भी किसी समय उसी संस्थान के कोलकता स्थित निगमीय कार्यालय में कार्यरत रहे, जिसकी एक परियोजना में मैं कार्यरत था| श्री बुद्धिनाथ जी का एक गीत बहुत प्रसिद्ध है- ‘एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बंधन की…