Category: Uncategorized
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जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा!
मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा,दीवारों से टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा| सईद राही
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चारागर भी पुराना चाहिए था!
अपनी ग़ज़लों में एक खास तरह का ‘पंच’ लेकर आने वाले स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अक्सर अपने श्रोताओं को चौंका देते थे, ऐसी कोई बात अपनी शायरी में लेकर आते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की यह ग़ज़ल- वफ़ा को आज़माना…
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हम कि रूठी हुई रुत को भी मना लेते थे!
हम कि रूठी हुई रुत को भी मना लेते थे,हम ने देखा ही न था मौसम-ए-हिज्राँ जाना| अहमद फ़राज़
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हर कोई अपनी ही आवाज़ से काँप उठता है!
हर कोई अपनी ही आवाज़ से काँप उठता है,हर कोई अपने ही साये से हिरासाँ जाना| अहमद फ़राज़
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मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद!
मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद,दिल पुकारे ही चला जाता है जाना जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना!
अव्वल-अव्वल की मुहब्बत के नशे याद तो कर,बे-पिये भी तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा एहसां जाना!
ज़िन्दगी तेरी अता थी सो तेरे नाम की है,हमने जैसे भी बसर की तेरा एहसां जाना| अहमद फ़राज़
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जल्द बदल जाते हैं इंसां जाना!
यूं ही मौसम की अदा देख के याद आया है,किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसां जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा पैमां जाना!
अब के तज्दीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जाना,याद क्या तुझ को दिलाएँ तेरा पैमां जाना| अहमद फ़राज़
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मैंने कुछ नहीं पूछा – रवींद्र नाथ ठाकुर
फिर से आज पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया…