Category: Uncategorized
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सफर पुराना, मंज़िल पुरानी!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हमारे फैमिली ग्रुप का नाम ही रहा है- ‘लंदन, गोवा, बंगलौर’, क्योंकि एक-एक बेटा इन तीनों जगह रहते रहे हैं| हम दो बार लंदन भी रह आए हैं, एक बार- एक माह के लिए और एक बार डेढ़ माह…
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किसी से हाय दिल को लगा के!
आज फिर से अपने प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मेरा मानना है की मुकेश जी का गाया लगभग हर गीत अमर है| अपनी आवाज का दर्द जब वे गीत में पिरो देते थे, तब चमत्कार ही हो जाता था| आज का यह गीत फिल्म- बारात से है,…
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जहां मन में नहीं है कोई भय- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…
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तब पता यह चला, मूलधन खो गया!
आज एक बार फिर से आज मैं हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रसिद्ध हस्ताक्षर, स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय त्यागी जी जुझारूपन की कविता के लिए जाने जाते थे और एक अलग तरह की छाप उनकी कविताओं की पड़ती थी| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर गीत कविता –…
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गीतांजलि-1 रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…
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अनोखा इतिहास ज्ञान!
एक बार फिर से आज मैं हिन्दी हास्य कविता के दुर्लभ हस्ताक्षर, स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यह एक लंबी हास्य कविता है जो उन्होंने एक ऐसे छात्र के बहाने से लिखी है, जो इतिहास की परीक्षा देने जाता है लेकिन उसे कुछ भी नहीं आता है| लीजिए…
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तू मुझे मेरे ही साये से डराता क्या है!
आज प्रस्तुत कर रहा हूँ ज़नाब शहजाद अहमद जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल, इस गजल के कुछ शेर गुलाम अली साहब ने भी गाए हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह सुंदर ग़ज़ल – अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है,एक नज़र मेरी तरफ भी, तेरा जाता क्या है| मेरी रुसवाई में तू भी है बराबर…
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किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा !
हिन्दी काव्य मंचों की शान रहे स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी की एक हिन्दी ग़ज़ल आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| कविता अपनी बात स्वयं कहती है और नीरज जी भी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल और नीरज जी के शब्दों में कहें तो ‘गीतिका’- बदन पे जिस के शराफ़त…
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न मैं होता तो क्या होता!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पोस्ट- एक पुराने संदर्भ से प्रेरणा लेते हुए आज का आलेख लिख रहा हूँ। लेकिन मैं उन प्रसंगों का ही उल्लेख कर रहा हूँ जिनसे मेरे जीवन, मेरे करियर को सकारात्मक दिशा मिली है। ऐसे प्रसंग नहीं हैं जिनके बारे में मैं…
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दृष्टि-अंधता का विस्तार!
आज ऐसे ही अचानक बात करने का बहाना मिल गया| क्रिकेट में बॉलर के लिए एक विशेष कुशलता मानी जाती है कि वह ऐसे कोण पर बॉल डाले, या ऐसा घुमाव दे कि खिलाड़ी उसको न देख पाए| मुझे याद है कि किसी समय भागवत चन्द्रशेखर भारतीय टीम के ऐसे बॉलर थे जिनकी बॉल बहुत…