Category: Uncategorized
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क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें!
सब कुछ तो है, क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें,क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता | निदा फ़ाज़ली
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गुज़र क्यूँ नहीं जाता!
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता,जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता| निदा फ़ाज़ली
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मैं दिल्ली हूँ मैंने कितनी, रंगीन बहारें देखी हैं!
आज मैं स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी ने भारतवर्ष की राजधानी दिल्ली के महाभारत काल से लेकर आज तक के कुछ प्रसंगों को एक कविता में पिरोया था, उसको प्रस्तुत कर रहा हूँ| दिल्ली के बारे में कहा भी जाता है कि ‘दिल’ की तरह दिल्ली भी कितनी बार उजड़ी है और फिर से बसी है|…
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अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा!
ज़बाँ है और बयाँ और उसका मतलब और,अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा| नीरज
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मुट्ठी में वो रतन देखा!
ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया,किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा| नीरज
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मैं हूँ बनफूल भला मेरा कैसा खिलना, क्या मुरझाना!
स्वर्गीय भारत भूषण जी एक असाधारण प्रतिभा वाले कवि और गीतकार थे| भारत भूषण जी के गीतों को सुनना ही एक दिव्य अनुभव होता था| भारत भूषण जी के अनेक गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ ‘बनफूल’ यह भी भारत भूषण जी का एक प्रसिद्ध गीत है|…