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गिला न करेंगे किसी से हम!
लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद, लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम| साहिर लुधियानवी
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कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम!
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम, ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम| साहिर लुधियानवी
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शेष!
श्री गंगा प्रसाद विमल जी की पहचान मुख्यतः कथाकार, उपन्यासकार के रूप में होती है परंतु उनके कविता संकलन भी प्रकाशित हुए हैं और एक कवि की भूमिका में भी वे समान रूप से सक्रिय रहे हैं||लीजिए आज प्रस्तुत है श्री गंगा प्रसाद विमल जी की यह लंबी कविता – शेषकई बार लगता हैमैं ही…
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ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है!
कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हमने, जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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हमीं ने तूफ़ान कर लिया है!
इक दिल के टूटने पर रोता है कोई इतना, झोंके को ख़ुद हमीं ने तूफ़ान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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ज़िंदगी का अरमान कर लिया है!
अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ, फिर हमने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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मुसीबतों को मेहमान कर लिया है!
हर बार अपने दिल की बातें ज़बाँ पे लाकर, हमने मुसीबतों को मेहमान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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चलकर नुक़सान कर लिया है!
जिन नेकियों पे चलकर अज्दाद कितने ख़ुश थे. हम ने उन्ही पे चल कर नुक़सान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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ख़ुद को इंसान कर लिया है!
सब लोग इससे पहले कि देवता समझते, हमने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है| राजेश रेड्डी