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सच न बोलना!
स्वर्गीय बाबा नागार्जुन जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी अपने किस्म के अनूठे कवि थे, फक्कड़पन के साथ जीवन जीने वाले और खरी बात कहने वाले| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता, गरीब मजदूरों का जो हाल उन्होंने देखा और ईमानदारी से और पूरी प्रभाविता के…
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मैं छः सेवक रखता हूँ – रुड्यार्ड किप्लिंग
फिर से मैं आज अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता…
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श्रीराम जी की जलसमाधि !
अभी हमने श्रीरामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम जी को याद किया| इस अवसर पर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ | आज फिर से मैं अपने प्रिय कवि/गीतकारों में से एक स्व. भारत भूषण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इस रचना में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जलसमाधि का…
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तुम हमें प्यार करो या ना करो!
स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी कहा है शैलेन्द्र जी फिल्म नगरी में विशाल बैनरों से जुड़े रहकर भी अंत तक एक जनकवि बने रहे| यह गीत 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘कैसे कहूँ’ के लिए लता मंगेशकर जी ने अपने सुमधुर स्वर में…
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तुम न जाने किस जहाँ में खो गये!
गायक सोनू निगम का एक इंटरव्यू सुन रहा था, जिसमें उन्होंने स्वर्गीय लता मंगेशकर जी के एक गीत को मिसाल के रूप में याद किया था| मुझे लगा कि आज इसी गीत को शेयर कर लेना चाहिए| यह गीत है फिल्म- ‘सज़ा’ से जिसे लिखा था – साहिर लुधियानवी जी ने और इसका संगीत तैयार…
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मेरी दिल्ली!
आज फिर से लंबे समय बाद दिल्ली-गुड़गांव क्षेत्र में आया हूँ| कुछ लिख पाऊँगा तो लिखूँगा, फिलहाल दिल्ली की एक पुरानी यात्रा से जुड़ा आलेख शेयर कर रहा हूँ| काफी लंबे समय के बाद दिल्ली आना हुआ, उस दिल्ली में जो लगभग डेढ़ वर्ष पहले तक मेरी थी, उसी तरह जैसे और भी लाखों, करोडों…
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छलक उठती हैं मेरी आँखें!
दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें,सारी मिट्टी मेरे तालाब में आ जाती है| मुनव्वर राना
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रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है!
ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा ओढ़े हुए,कूचा – ए – रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है| मुनव्वर राना
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दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है!
एक कमरे में बसर करता है सारा कुनबा,सारी दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है| मुनव्वर राना
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तस्वीर-सी महताब में आ जाती है!
रात भर जागते रहने का सिला है शायद,तेरी तस्वीर-सी महताब में आ जाती है| मुनव्वर राना