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‘हाला’- बच्चन जी की मधुबाला से
आज स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनके बारे में काफी बातें भी की हैं| एक घटना जो मुझे अक्सर याद आती है वह है आकाशवाणी, नई दिल्ली में श्रीमती कमला शास्त्री द्वारा लिया गया बच्चन…
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अँधेरों को दिए जाते हैं!
हम हैं एक शम्अ मगर देख के बुझते बुझते, रौशनी कितने अँधेरों को दिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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ये सज़ा कम तो नहीं है के!
क्यूँ हमें मौत के पैग़ाम दिए जाते हैं, ये सज़ा कम तो नहीं है के जिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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वो मिट जाता है इक दिन!
जो दिखता है वो मिट जाता है इक दिन,नहीं दिखता वो, जो फ़ानी नहीं है| राजेश रेड्डी
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एक छोटी सी मुलाकात!
स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हिन्दी में अपनी तरह के एक अनूठे कवि थे| उनकी एक कविता जो अक्सर मुझे याद आती है, वह है- ‘उठ मेरी बेटी सुबह हो गई’ जिसमें एक लाचार पिता अपनी बच्ची को जीवन की कुछ समझाता है| लीजिए प्रस्तुत है, स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता, जिसका…