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दिल उसी ग़म की राजधानी है!
दोनों आलम हैं जिसके ज़ेर-ए-नगीं, दिल उसी ग़म की राजधानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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लहर सागर का नहीं श्रृंगार!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी काव्य मंचों पर हिन्दी गीत को एक नई पहचान देने वाले, गीत विधा के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, बच्चन जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और वे किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं| लीजिए, आज…
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शक्ति या सौन्दर्य!
आज एक बार फिर मैं देश के राष्ट्रकवि और हिन्दी के एक श्रेष्ठतम कवियों में से एक, स्वर्गीय रामधारी सिंह “दिनकर” जी की एक ओजस्वी रचना शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी का अपना नाम ही सूर्य के तेज को प्रकट करता है, उनके बारे में कुछ कहना सूर्य को दिया दिखाना होगा| लीजिए, प्रस्तुत…