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जंगल की याद मुझे मत दिलाओ!
एक बार फिर मैं स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी ने इस कविता में जंगल के एक पेड़ को पीड़ा को अभिव्यक्त किया है, जो जंगल में अनेक पक्षियों का निवास था, आज वह पेड़ जल रहा है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी यह…
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दिल्ली की तस्वीर!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे अत्यंत प्रिय नवगीतकार रहे हैं, जब कविता लिखना प्रारंभ किया था तब मैं उनके नवगीत अक्सर गुनगुनाया करता था| रंजक जी के अनेक नवगीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में बहुत से संस्मरण भी साझा किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का…
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शबनम फूल के प्यालों में!
यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम, जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र
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चुटकी ले नर्म नर्म गालों में!
रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा, जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में| बशीर बद्र