Category: Uncategorized
-
लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं!
अभी से दिल ओ जाँ सर-ए-राह रख दो, कि लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
वो याद भी कम आते हैं!
और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो, दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
तुम्हारे चरण!
लंबे अंतराल के बाद आज मैंने स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना प्रस्तुत की| लेकिन फिर मालूम हुआ कि यह रचना मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए अब प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक और कविता– ये शरद के चाँद-से उजले…
-
सृजन का शब्द!
लंबे अंतराल के बाद आज फिर से मैं स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारती जी ने साहित्य की हर विधा में अपना अमूल्य योगदान किया था- उपन्यास, कहानियाँ, कविताएं, गीत, संस्मरण आदि-आदि और ‘धर्मयुग’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका का संपादन भी किया| उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की…
-
मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं!
एक इक कर के हुए जाते हैं तारे रौशन, मेरी मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
काबे में सनम आते हैं!
दिल में अब यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं, जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
हारे भी तो बाज़ी मात नहीं!
गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा, गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ!
मैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ, आशिक़ तो किसी का नाम नहीं कुछ इश्क़ किसी की ज़ात नहीं| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़