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न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा!
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।है यक़ीं अब न कोई शोर-शराबा होगाज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा| साबिर दत्त
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प्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं!
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।आंधी नफ़रत की चलेगी न कहीं अब के बरसप्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं अब के बरस| साबिर दत्त
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भूख के मारे कोई —
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।भूख के मारे कोई बच्चा नहीं रोएगाचैन की नींद हर एक शख़्स यहाँ सोएगा| साबिर दत्त
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नववर्ष – 2022
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।ज़ुल्म की रात बहुत जल्द टलेगी अब तोआग चूल्हों में हर इक रोज़ जलेगी अब तो| साबिर दत्त
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सर न कांधे से सहेली के उठाया होगा!
आज जिस गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, वह युद्ध की पृष्ठभूमि में बनी प्रसिद्ध फिल्म- ‘हक़ीक़त’ से है और इसको चार श्रेष्ठ पुरुष गायकों- मोहम्मद रफ़ी साहब, मन्ना डे साहब, भूपेन्द्र जी और तलत महमूद जी ने बड़े खूबसूरत अन्दाज़ में गाया है| कैफ़ी आज़मी साहब का लिखा यह गीत, अपने बोलों, श्रेष्ठ…
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मुबारक हो नया साल
आने वाले स्वागत, जाने वाले विदा, अगले चौराहे पर इंतजार शुक्रिया|नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं|
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समुंदर नज़र आया होगा!
अपने जंगल से जो घबरा के उड़े थे प्यासे,हर सराब उन को समुंदर नज़र आया होगा| कैफ़ी आज़मी
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जंगल तो पराया होगा!
बिजली के तार पे बैठा हुआ हँसता पंछी,सोचता है कि वो जंगल तो पराया होगा| कैफ़ी आज़मी
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लहू अपना पिलाया होगा!
बानी-ए-जश्न-ए-बहारां ने ये सोचा भी नहीं,किसने कांटों को लहू अपना पिलाया होगा| कैफ़ी आज़मी
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जब सर पे न साया होगा!
पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था,जिस्म जल जाएंगे जब सर पे न साया होगा| कैफ़ी आज़मी