तुझे क़सम है तमाशे भी!

अभी तो सिर्फ़ कमाल-ए-ग़ुरूर देखा है,
तुझे क़सम है तमाशे भी इंकिसार* के देख|

*विनम्रता

महशर आफ़रीदी

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