शायद वो कुछ सोच रहा हो!

अर्ज़-ए-तलब पर उस की चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर,
शायद वो कुछ सोच रहा हो ऐसा भी हो सकता है|

मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

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