ऐसा भी हो सकता है!

तर्क-ए-मोहब्बत अपनी ख़ता हो ऐसा भी हो सकता है,
वो अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो ऐसा भी हो सकता है|

मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

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