तूफ़ाँ के बा’द मैं भी बहुत टूट सा गया,
दरिया फिर अपने रुख़ पे बहा ले गया मुझे|
कृष्ण बिहारी नूर
रुख़ पे बहा ले गया मुझे!
One response to “रुख़ पे बहा ले गया मुझे!”
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🙏🏻🙏🏻
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A sky full of cotton beads like clouds
🙏🏻🙏🏻
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