तुम्हारे अहद-ए-हुकूमत का सानेहा ये है,
कि अब तो लोग घरों से भी कम निकलते हैं|
मुनव्वर राना
घरों से भी कम निकलते हैं!
One response to “घरों से भी कम निकलते हैं!”
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Wah wah 🙏🏻
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A sky full of cotton beads like clouds
Wah wah 🙏🏻
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