इश्क़ के क़िस्से न छेड़ो दोस्तो,
मैं इसी मैदाँ में हारा था कभी|
शारिक़ कैफ़ी
इश्क़ के क़िस्से न छेड़ो!
One response to “इश्क़ के क़िस्से न छेड़ो!”
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🤍🤍
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A sky full of cotton beads like clouds
🤍🤍
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