ऊँचाइयाँ हासिल हुईं !

ऊँचाइयाँ हासिल हुईं तक़दीर से जिन को,
इक रोज़ वो सब लोग भी सूरज से ढले हैं|

विजेंद्र सिंह परवाज़

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