वो भी तो हमें छोड़ के रुख़्सत हुए कब के,
हम जिन के अँधेरों में चराग़ों से जले हैं|
विजेंद्र सिंह परवाज़
अँधेरों में चराग़ों से जले हैं!
One response to “अँधेरों में चराग़ों से जले हैं!”
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🙏🏻🙏🏻
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