मैं अपनी शक्ल भी देखूँ!

जो तू नहीं तो ये दुनिया रुकी-रुकी सी लगे,
मैं अपनी शक्ल भी देखूँ तो अजनबी सी लगे|

विजेंद्र सिंह परवाज़

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