मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर-
मुद्दतों से यही आलम न तवक्को न उम्मीद!
शायर- अहमद फराज
गायक- ग़ुलाम अली
आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।
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