सुकूत-ए-शाम से पहले की मंज़िल सख़्त होती है,
कहो लोगों से सूरज को न यूँ ढलता हुआ देखें।
शहरयार
न यूँ ढलता हुआ देखें!
One response to “न यूँ ढलता हुआ देखें!”
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🤍🤍
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A sky full of cotton beads like clouds
🤍🤍
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