ख़ुशबू लब-ए-लालीं की!

छलकाए हुए चलना ख़ुशबू लब-ए-लालीं की,
इक बाग़ सा साथ अपने महकाए हुए रहना|

मुनीर नियाज़ी

One response to “ख़ुशबू लब-ए-लालीं की!”

Leave a comment