मिट गईं रौनक़ें!

मिट गईं रौनक़ें चराग़ों की,
लुट गए रहगुज़ार सोने दे|

क़तील शिफ़ाई

2 responses to “मिट गईं रौनक़ें!”

  1. वाह वाह 🙏🏻

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