चाँदनी का ग़ुबार!

ऊँघता है उदास पेड़ों पर,

चाँदनी का ग़ुबार सोने दे|

क़तील शिफ़ाई

2 responses to “चाँदनी का ग़ुबार!”

    1. धन्यवाद जी

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