तुझसे दूर रहकर मैं!

जिंदगी तुझसे दूर रह कर मैं,
काट लूंगी जलावतन की तरह।

परवीन शाकिर

2 responses to “तुझसे दूर रहकर मैं!”

    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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