दरिया की रवानी देना!

कश्तियाँ देना मगर इज़्न-ए-सफ़र से पहले,
ठहरे पानी को भी दरिया की रवानी देना|

क़ैसर शमीम

2 responses to “दरिया की रवानी देना!”

  1. वाह वाह।

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