कहाँ से आ गए बादल!

प्रस्तुत है आज की यह रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

रात में जाने कहाँ से आ गए बादल
सुबह देखा गगन भर में छा गए बादल।

कौन सी बस्ती न जाने
छोड़कर आए,
यह जगह भी अब न जाने
कब तलक भाए,

शुष्क धरती रात भर में
हो गई दलदल।

जलधि जल ले साथ चलते
ग्रीष्म से लड़ने
इंद्र इनको भेजता
उस पर फतह करने

आज इनकी जीत पर
किसकी विजय हो कल।

युद्ध गर्मी से नहीं यह
एक दिन भर का,
यह सतत संघर्ष
जल का और दिनकर का

ला रहे भर-भर पतीले
दागने को जल।

ताप का संताप जब
हर रोज हैं सहते,
दुखी होकर प्रार्थना में
सब यही कहते

शीघ्र प्रभु कर दो हमारी
यह समस्या हल।

अति कठिन जीवन यहाँ
रहता मनुज का है
आज जो हल है
वही कल की समस्या है
,

जहाँ तक जीवन, वहाँ तक
सिर्फ कोलाहल।


आज के लिए इतना ही,
धन्यवाद।

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3 responses to “कहाँ से आ गए बादल!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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