टाट के पर्दे में रहती है!

अमीरी रेशम-ओ-कम-ख़्वाब में नंगी नज़र आई,
ग़रीबी शान से इक टाट के पर्दे में रहती है|

मुनव्वर राना

2 responses to “टाट के पर्दे में रहती है!”

  1. बहुत खूब लिखा है

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    1. जी, मुनव्वर राना जी बहुत अच्छे शायर थे

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