जब ये शब्द भी भोथरे हो जाएंगे!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री गिरिधर राठी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

राठी जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

आज प्रस्तुत हैं श्री गिरिधर राठी जी की यह कविता-

चोर को कहा चोर
वह डरा
थोड़े दिन
डरा क्योंकि उस को पहचान लिया गया था

चोर को कहा चोर
वह ख़ुश हुआ
बहुत दिनों तक रहा ख़ुश
क्योंकि उसे पहचान लिया गया था

फिर छा गया डर
क्योंकि चोर आख़िर चोर था
बोलने वालों के हाथ सिर्फ़ हाथ थे
हाथ भी नहीं केवल मुँह थे
मुँह ही नहीं केवल शब्द थे
शब्द भी नहीं
केवल शोर…

चोर! चोर!!

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “जब ये शब्द भी भोथरे हो जाएंगे!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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