जिसे पाया नहीं उसको!

जिसे देखा नहीं रोता हूँ उस की याद में शब-भर,
जिसे पाया नहीं उस को गँवा कर देख लेता हूँ|

नज़ीर क़ैसर

4 responses to “जिसे पाया नहीं उसको!”

  1. क्या खूब कहा है नज़ीर क़ैसर ने,,,,

    जिसे कभी देखा नहीं, उसकी याद में रोना—और जिसे कभी पाया नहीं, उसे खो देने का दुःख महसूस करना यह बताता है कि प्रेम का संबंध हमेशा प्राप्ति से नहीं होता; कभी-कभी अभाव ही सबसे गहरी उपस्थिति बन जाता है।

    शायद दिल की दुनिया में पाने और खोने की सीमाएँ उतनी स्पष्ट नहीं होतीं, जितनी जीवन में दिखाई देती हैं। कुछ रिश्ते वास्तविक होकर भी अधूरे रह जाते हैं, और कुछ कभी अस्तित्व में न आकर भी भीतर पूरी उम्र जीवित रहते हैं।

    कभी-कभी जिसे पाया नहीं होता, उसी को खोने का दुःख सबसे अधिक अपना लगता है।

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    1. बहुत सुंदर व्याख्या है जी आपकी

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  2. Bahut hi sundar🤍🦋✨

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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