वो मोहब्बत का बयाँ हो!

हम जिसे अपनी ज़बाँ से भी न कहने पाएँ,
वो मोहब्बत का बयाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं|

साहिर होशियारपुरी

2 responses to “वो मोहब्बत का बयाँ हो!”

    1. धन्यवाद जी

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