पहचानता लगे है मुझे!

मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह,
ये मेरा गाँव तो पहचानता लगे है मुझे|

जाँ निसार अख़्तर

2 responses to “पहचानता लगे है मुझे!”

  1. ये बहुत ही प्यारा है🙏🏻

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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