ये लम्हा ज़ीस्त का बस !

ये लम्हा ज़ीस्त का बस आख़िरी है और मैं हूं,
हर एक सम्त से अब वापसी है और मैं हूं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

2 responses to “ये लम्हा ज़ीस्त का बस !”

    1. धन्यवाद जी

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