मैं जानता हूँ कि ख़ामुशी में ही मस्लहत है,
मगर यही मस्लहत मिरे दिल को खल रही है|
जावेद अख़्तर
मिरे दिल को खल रही है!
One response to “मिरे दिल को खल रही है!”
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🤍🤍🦋
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A sky full of cotton beads like clouds
🤍🤍🦋
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