आज मैं श्रेष्ठ हिंदी नवगीत कवि स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।
आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत-

शाख़-शाख़ बुलबुल
लिखती है
पत्ता-पत्ता गुल
लिखती है ।
बेटी माँ से
जो पढ़ती है
बच्चों में वो कुल लिखती है ।
सहर लिखे
उसकी पेशानी
शब उसके काकुल लिखती है ।
हर लम्हे वो
फ़लक वक़्त की
जस का तस बिल्कुल लिखती है ।
जब लिखती है
हवा इबारत
पानी पर ढुलमुल लिखती है ।
आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********
Leave a comment