शेर अपने बिल में!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि उद्भ्रांत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

उद्भ्रांत जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

आज प्रस्तुत हैं उद्भ्रांत जी की यह कविता-

चूहा
अपने बिल में
शेर की तरह
बेखौफ़

ताव देता
मूँछो पर

वक़्त-बेवक़्त
गुर्राता

ज़रूरत पड़ने पर
मारे दहाड़

चुहिया ने
ललकारा
मर्दानगी को

निकला छाती फुलाए
अकड़ाए हुए गर्दन
पूरी ऐंठ के साथ

दूर से ही
दिखी झलक
काल-बिलौटे की

बब्बर शेर
वापस अपने
बिल में।

आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

6 responses to “शेर अपने बिल में!”

  1. बहुत सुंदर।

    Liked by 2 people

    1. हार्दिक धन्यवाद जी

      Liked by 1 person

      1. आपका हार्दिक आभार, सर जी। 🙏🌸
        आपके स्नेहपूर्ण शब्द मेरे लिए बहुत मूल्यवान हैं। आपका प्रोत्साहन ही आगे बेहतर लिखने की प्रेरणा देता है।

        Liked by 1 person

      2. आपका स्वागत है जी

        Liked by 1 person

  2. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a comment