न राहज़न से ग़रज़ है!

किसी की राह-ए-मोहब्बत में बढ़ता जाता हूँ,
न राहज़न से ग़रज़ है न राहबर से मुझे|

गुलज़ार देहलवी

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  1. 👌🏻👌🏻🤍🦋

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