आज मैं श्रेष्ठ उर्दू शायर स्वर्गीय हस्तीमल हस्ती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।
हस्ती जी के कुछ शेर मैंने पहले भी शेयर किए हैं।
आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हस्तीमल हस्ती जी की यह ग़ज़ल –
काम करेगी उसकी धार
बाकी लोहा है बेकार
कैसे बच सकता था मैं
पीछे ठग थे आगे यार
बोरी भर मेहनत पीसूँ
निकले इक मुट्ठी भर सार
भूखे को पकवान लगें
चटनी, रोटी, प्याज, अचार
जीवन है इक ऐसी डोर
गाठें जिसमें कई हज़ार
सारे तुग़लक चुन-चुन कर
हमने बना ली है सरकार
शुक्र है राजा मान गया
दो दूनी होते हैं चार
आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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