ग़ज़ल में जिस की हमेशा चराग़ जलते हैं,
उसे कहीं से बुलाओ बड़ा अँधेरा है।
बशीर बद्र
उसे कहीं से बुलाओ!
2 responses to “उसे कहीं से बुलाओ!”
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बहुत सुंदर और विचारोत्तेजक शेर। 🙏🌹
जब बाहर का अँधेरा बढ़ जाता है, तब किसी एक दीपक को नहीं, भीतर के चिराग़ को पुकारना पड़ता है। जिस हृदय में आत्मबोध का प्रकाश जल उठे, वही स्वयं भी राह पाता है और दूसरों के लिए भी दिशा बन जाता है।अँधेरों को उजालों की तलाश होती है,
उजालों को किसी शोर की नहीं।
जो अपने भीतर स्वयं चराग़ जला ले,
उसे फिर किसी और की नहीं।चलो उस शख़्स को आवाज़ दें
जिसकी रूह में नूर पलता है,
एक दीपक क्या करेगा,
जब इंसान ही सूरज बनकर जलता है।-महोदधि बा अदब
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