क्षण-क्षण की छैनी से!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय हरीश भादानी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

भादानी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हरीश भादानी जी का यह गीत-

क्षण-क्षण की छैनी से
काटो तो जानूँ!

पसर गया है
घेर शहर को
भरमों का संगमूसा
तीखे-तीखे शब्द सम्हाले
जड़े सुराखो तो जानूँ!

फेंक गया है
बरफ छतों से
कोई मूरख मौसम
पहले अपने ही आंगन से
आग उठाओ तो जानूँ!

चैराहों पर
प्रश्न-चिन्ह सी
खड़ी भीड़ को
अर्थ भरी आवाज लगाकर
दिशा दिखाओ तो जानूँ!

आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********



2 responses to “क्षण-क्षण की छैनी से!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 1 person

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a comment