ज़िंदगी का मुक़द्दर!

मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फ़ाज़ली जी की ग़ज़ल ‘हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी’ के आखिरी दो शेर
निदा फ़ाज़ली जी उर्दू शायरी के बेहतरीन स्तंभ थे।
इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया था
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफर दर सफर

आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।
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