रफ़्तार पर है वो नाज़ाँ!

ये क्या कि अपनी ही रफ़्तार पर है वो नाज़ाँ,
किसी के रेंगते क़दमों को आब-ओ-ताब तो दे|

क़ैसर ख़ालिद

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