एक ये दिन जब लाखों ग़म!

मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है जावेद अख़्तर जी का एक और शेर, जिसे जगजीत सिंह जी ने भी गाया था-

एक ये दिन जब लाखों ग़म और काल पड़ा है आंसू का!

आशा है आपको यह पसंद आएगा,

धन्यवाद।

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2 responses to “एक ये दिन जब लाखों ग़म!”

  1. Bahut badhiya🙏🏻

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