मुद्दतें हो गईं ‘इज़्ज़त का!

आज आऊँगा तिरे पास मोहब्बत ले कर,
मुद्दतें हो गईं ‘इज़्ज़त का जनाज़ा निकले|

इब्राहीम अली ज़ीशान

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