आनेवाला खतरा!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक रहे स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

रघुवीर सहाय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की यह कविता –

इस लज्जित और पराजित युग में
कहीं से ले आओ वह दिमाग़
जो खुशामद आदतन नहीं करता

कहीं से ले आओ निर्धनता
जो अपने बदले में कुछ नहीं माँगती
और उसे एक बार आँख से आँख मिलाने दो

जल्दी कर डालो कि पहलने-फूलनेवाले हैं लोग
औरतें पिएँगी आदमी खाएँगे -– रमेश
एक दिन इसी तरह आएगा -– रमेश
कि किसी की कोई राय न रह जाएगी -– रमेश
क्रोध होगा पर विरोध न होगा
अर्जियों के सिवाय -– रमेश
ख़तरा होगा ख़तरे की घण्टी होगी
और उसे बादशाह बजाएगा – रमेश


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “आनेवाला खतरा!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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