हर गुलिस्ताँ में ख़िज़ाँ हो!

मिल ही जाएगी कहीं ढूँढने वाले को बहार,
हर गुलिस्ताँ में ख़िज़ाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं|

साहिर होशियारपुरी

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